Monday, 26 April 2010

राम नाम महात्मय

प्रिय राम भक्तों, सीताराम। किसी ने ठीक ही कहा है, "राम ते बड़ा राम कर नामा"। अनुभवी इस बात से भली भांति परिचित होंगे कि राम नाम में एक ऐसी अचूक शक्ति है जो इस संसार के क्या, परलोकों के संकट काटने में सक्षम है। तुलसीदास जी मानस में ही जन मानस को सूक्ष्म अपितु सटीक सन्देश दे गए है,

"सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान
सादर सुनहिं तें तरही भव सिंधु बिना जल जान।।"

श्री राम से बड़ा कृपालु तो संसार में कोई नही, उन्ही कृपालु की करुना-लीला का पात्र बन मैंने हालही में राम नाम महात्मय को अनुभव किया, गत एक माह की अवधि में मेरे समक्ष कुछ ऐसे अवसर आय जब कि मुझे लगा की मैं उस कठिनाई का समाधान करने में सक्षम हूँ, पर न जाने क्यूँ मैं हार रहा था। पर तब रामबाण के समान रामनाम का स्मरण करते ही मैंने ये अनुभव किया की स्थितियां कुछ परिवर्तित हो रही है, जहा मुझे कुछ उपाय नही सूझ रहा था, वहीं मैं कुशलता दर्शाने लगा, मेरी असमर्थता, समर्थता में बदल गई, और मैं सफल रहा। राम नाम जपते ही मेरे मन में एक विश्वास जाग गया की अब तो कोई परेशानी हो ही नही सकती और सच में परेशानियां रही भी नहीं। एक उदाहरण के तौर पर, आप सभी को एक वास्तविक घटना बताता हूँ, एक माह पहले मेरी भौतिक विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा थी, परीक्षा के पहले ही मैंने सभी प्रयोगों की अच्छी कसरत कर ली थी और परीक्षा में भी वही प्रष्न आया जिसकी मुझे दूसरों से अधिक कसरत थी, परन्तु फिर भी परीक्षा कक्ष में मैंने अपना नियंत्रण खो दिया और नतीजन समय बीत रहा था पर मैं कुछ भी नही कर पा रहा था, काफी देर तक असफल प्रयास करने के बाद मैं कुछ देर रुका। सोचा की क्या करू, आँखें बंद करी, गहरी सांस ली और मन में ही राम नाम का जाप किया। आँखें खोली तो लगा की आत्मविश्वास में कुछ वृद्धि हुई है। फिर जब पुन्नः प्रयास किया तो प्रसन्न हो गया। उसके बाद का प्रयोग मैंने सफलता से किया और मुझे उस परीक्षा में अच्छे अंको की आशा भी है। उसके बाद की अधिकतर परीक्षाओं में मैंने अपने प्रष्न पत्र पर || श्री राम || लिखा और मेरी अधिकतर परीक्षाएँ अच्छी हुई। इसी अनुभव को मूल बना कर मैंने प्रभु कृपा से इस कविता की रचना की जिसका शीर्षक "राम नाम" है।

-जय जय सियापति श्री रामचंद्र-
-जय जय श्री राम भक्त श्री हनुमान-

-दास-

राम नाम

उल्टा जप लेओ, सीधा जप लेओ राम नाम फिर भी फल दायक |
उल्टा जपते जपते जिसको डाकू बन गए सब बिधि लायक ||

कोऊ जाने कुल, जाति को जाने, कोऊ जाने कीन्ह जाए |
रामबोला भये तुलसी बाबा सब जग जाने जाए ||

धर्म (भरत) स्वयं जो नाम जपत है, दशरथ जपै जो नाम |
ओ नाम जपत ही सब बन्धुन के बन जाए सब काम ||

दुई वर्णन के राम नाम में दूँडो तो सृष्टि मिलि जाए |
महिमा ऐसी राम नाम कि पाथर में नारी दिखलाए ||

राम नाम तो पवन ऐसा पाथर के बंधन मिट जाए |
राम नाम की शक्ति ऐसी वन अशोक की लाज बचाए ||

राम नाम सुन्दर है ऐसा शंकर भी भव में अकुलाए |
हनुमत जिनके दास परम है नाम वहीं अमृत कहलाए ||

है आधा जो नाम सीय बिन, महिमा उसकी कही न जाए |
दास नवावै सीस चरण में "सीताराम" कहत वो जाए ||

|| सीताराम ||


6 comments:

आमीन said...

राम ते बड़ा राम का नाम

http://mydunali.blogspot.com/

rajeevspoetry said...

हिंदी ब्लॉग जगत में स्वागत है.

-राजीव भरोल

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

Dr. shyam gupta said...

राम-राम

saurabh said...

ram ram ram ram ram..........
ram se bada ram ka nam......
bhaiya ram ram ram.......
likhte rahiye....
lekin ye awasya dhyan rakhiye ki ram ka nam awasarvadi ya fir kayar nahi banata ya kewal kami chhupane ka jariya na ban jaye...
shesh ram kaj kiye bina mohi kahan vishram..........

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

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